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15 किलो वजन को ऐसे करे एक महीने में कम

बढ़ रहा वजन आजकल की एक बहुत बड़ी समस्या है । जो इंसान इस से जूझ रहा हो वह इसे दूर करने के लिए बहुत कोशिश करता रहता है । वह अपना खाना पीना तक कम कर देता है  लेकिन बढ़ रहा वजन  कम नही हो पाता है उसे कम करने के लिए आपको सही guidence की जरूरत होती है ।लोग वजन कम करने के लिए ज़रूरत से ज्यादा चिंता करते हैं । आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपना वजन कम कर सकते हैं वह भी 1 महीने में 15 किलो तो आइए जानते हैं कि हम किस तरह से वजन कम कर सकते हैं 1 महीने में  1 )  एलोवेरा जूस - एलोवेरा जूस प्रतिदिन पीने से आपका वजन धीरे-धीरे कम होने लग जायेगा । 2 से 3 एलोवेरा juse 1 गिलास पानी में मिलाकर सेवन करें। ऐसा हर रोज करने से आपकेा कई किलो वजन कम हो जायेगा । 2 ) गुंनगुना जल - हर रोज गुंनगुना पानी पीने की आदत बनाए । ऐसा करने से  कई किलो वजन कम हो जाएगा l

बढ़ रही उम्र के लक्षणों को कम करने का नुस्खा

हर उम्र का व्यक्ति यही सोचता है कि वह बस 20 वर्ष की तरह ही जवान और सुंदर दिखाई देता रहे लेकिन 30 40 वर्ष के बाद ऐसा नहीं रहता वह बढ़ रही उम्र के लक्षणों से गिर जाता है और उसका आत्मविश्वास कम होने लगता है तो आज हम आपको बताएंगे ऐसे उपाय के बारे में जिसे करने से आप पढ़ रही उम्र के लक्षणों को कम कर सकते हैं। इसके बनाने के लिए आपको सामग्री चाहिए -  1 )   अनार के छिलके   2 ) देसी गुलाब की पंखुड़ियां और  3 )मिट्टी से बना हुआ बर्तन नुस्खे को बनाने की विधि सबसे पहले आप गैस ऑन करें इसके   बाद  गैस पर बर्तन रखें  इस बर्तन में  200 ग्राम पानी डालें  इसमें अनार के छिलके गुलाब की पंखुड़ियां डालें  और 20 मिनट तक पकाएं जब पानी सौ ग्राम रहे तब इसे गैस जी उतार दीजिए । ठंडा होने के बाद इसे  हर रोज पी लीजिए।  ऐसा हर रोज करने से आपके बढ़ रहे उम्र के लक्षण कम हो जाएंगे और आपकी त्वचा भी टाइट हो जाएगी ।

ब्रह्मचर्य पालन करने के लिए नियम

ऋषियों का कथन है कि ब्रह्मचर्य ब्रह्म-परमात्मा के दर्शन का द्वार है, उसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए यहाँ हम ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियमों एवं उपायों की चर्चा करेंगेः 1.      ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित है। इसलिए मन को नियंत्रण में रखो और अपने सामने ऊँचे आदर्श रखो। 2.      आँख और कान मन के मुख्यमंत्री हैं। इसलिए गंदे चित्र व भद्दे दृश्य देखने तथा अभद्र बातें सुनने से सावधानी पूर्वक बचो। 3.      मन को सदैव कुछ-न-कुछ चाहिए। अवकाश में मन प्रायः मलिन हो जाता है। अतः शुभ कर्म करने में तत्पर रहो व भगवन्नाम-जप में लगे रहो। 4.      'जैसा खाये अन्न, वैसा बने मन।' - यह कहावत एकदम सत्य है। गरम मसाले, चटनियाँ, अधिक गरम भोजन तथा मांस, मछली, अंडे, चाय कॉफी, फास्टफूड आदि का सेवन बिल्कुल न करो। 5.      भोजन हल्का व चिकना स्निग्ध हो। रात का खाना सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले खाओ। 6.      दूध भी एक प्रकार का भोजन है। भोजन और दूध के बीच में तीन घंटे का अंतर होना चाहिए। 7. ...